हिम्मत खिच रही है,
ताक़त कम हो रही है,
एक कदम आगे लेना है,
मैं ले नहीं पा रहा ।
लड़ाई तो बस शुरू हुई है,
कुछ बातें ख़त्म हुई हैं,
कोई बड़ी गाज गिरी नहीं है,
पर थकान ऐसी है,
की साँस ले नहीं पा रहा ।
चार सपने थे कुछ दिन पहले,
फिर वो तीन रह गए,
फिर एक ही बचा,
अब उस एक को भी,
मैं बचा नहीं पा रहा ।
कुछ दुनिया खोखली सी महसूस होती है,
मन में कुछ धुंधला सा है,
कुछ काँप रहा है रूह में,
कुछ और महसूस कर नहीं पा रहा ।
ये कौन सा ऐसा वक्त है,
बदन कुछ जकड़ सा गया है,
ज़हन में ना जाने क्या बैठ गया है,
दिल से डर जा नहीं पा रहा ।
ताक़त कम हो रही है,
एक कदम आगे लेना है,
मैं ले नहीं पा रहा ।
लड़ाई तो बस शुरू हुई है,
कुछ बातें ख़त्म हुई हैं,
कोई बड़ी गाज गिरी नहीं है,
पर थकान ऐसी है,
की साँस ले नहीं पा रहा ।
चार सपने थे कुछ दिन पहले,
फिर वो तीन रह गए,
फिर एक ही बचा,
अब उस एक को भी,
मैं बचा नहीं पा रहा ।
कुछ दुनिया खोखली सी महसूस होती है,
मन में कुछ धुंधला सा है,
कुछ काँप रहा है रूह में,
कुछ और महसूस कर नहीं पा रहा ।
ये कौन सा ऐसा वक्त है,
बदन कुछ जकड़ सा गया है,
ज़हन में ना जाने क्या बैठ गया है,
दिल से डर जा नहीं पा रहा ।
--
salil
salil