इक दिन जब आँख खुली,
दो नन्हे दाँतो के बीच थी उँगली दबी,
तीसरी शरारत जब तेरी पकड़ी,
चार दिशाएँ ठहाके लगा के हंसी ।
पाँच देव,
छः मौसम,
सात धरती और,
आठ ग्रहों का आशीर्वाद ।
नौ ख़ुशियों की बात,
दस पीढ़ियों की सूझ,
ग्यारह खिलाड़ियों की बूझ,
बारह महीनो के बोल ।
आज एक साल का है,
हमारे भविष्य का श्लोक ।
दो नन्हे दाँतो के बीच थी उँगली दबी,
तीसरी शरारत जब तेरी पकड़ी,
चार दिशाएँ ठहाके लगा के हंसी ।
पाँच देव,
छः मौसम,
सात धरती और,
आठ ग्रहों का आशीर्वाद ।
नौ ख़ुशियों की बात,
दस पीढ़ियों की सूझ,
ग्यारह खिलाड़ियों की बूझ,
बारह महीनो के बोल ।
आज एक साल का है,
हमारे भविष्य का श्लोक ।
--
salil
salil